Monitor kya hai in Hindi कितने प्रकार हैं

अगर मॉनीटर नहीं होता तो computer कैसा लगता सायद कम्प्यूटर चलाना बहोत बोरिंग लगता। मॉनीटर आने के बाद कंप्युटर को समझना बहोत आसान हो गया है। क्योकि यूजर द्वारा दिये गये इनपुट को monitor पर दिखाता है। इस लेख में हम “monitor kya hai” इसी विषय पर बात करने वाले हैं।


Monitor एक हार्डवेयर डिवाइस है जो कंप्युटर का एक हिस्सा है, यह बहोत अहम भूमिका निभाता है जिससे text, image, graphics तथा video को दिखाने में मदत करता है। इसका resolution TV से अच्छा होता है और वजन भी कम होता है। इसे VDU(Visual display unit) भी कहते है।


Monitor kya hai – मॉनीटर की परिभाषा


मॉनीटर एक output device है, इसमे user द्वारा दिये गये instruction (text, image, video & graphics) को computer monitor पर दिखाता है।


What is history of monitor- मॉनीटर का इतिहास


मॉनीटर TV के तरह दिखता है लेकिन यह दोनों अलग-अलग कामो के लिये बनाये गये है। कार्ल फेर्डिनैन्ड ब्राउन (karl Ferdinand broun) ने पहला monitor 1897 में बनाया जो CRT टेक्नोलॉजी पर based था। इसे एक जर्मन भौतिक वैज्ञानिक द्वारा बनाया गया था। monitor kya hai इसमे पूरा इतिहास जानेंगे।

टच स्क्रीन टेक्नोलॉजी का अविष्कार इरिक आर्थर जॉनसन ने सबसे पहले 1965 में किया था। यह इंग्लैंड के नागरिक थे इसका उपयोग एयर फोर्स को कंट्रोल करने में किया जाता था। 1 मार्च 1973 में सबसे पहला मोनोग्राम डिस्प्ले तकनीक का जेरॉक्स अल्टो कंप्युटर बनाया गया। इसके बाद 1975 में जॉर्ज सैमुअल हर्स्ट ने पहला प्रतिरोधक मॉनीटर बनाया लेकिन 1982 के पहले चलाया गया था।

IBM ने 1987 me पहला उच्च तकनीकी कंप्युटर निगम IBM 8513 को बनाया। यह एक प्रकार का पोर्ट होता है जो मॉनीटर और CPU को एक साथ जोड़ता हैं। इसके बाद 1989 में VESA(Video electronic standerd association) जो कंप्युटर डिस्प्ले और मॉनीटर तकनीकी का संगठन है। उन्होंने SVGA नामक मानक को बनाया।


How does monitor work – मॉनीटर कार्य कैसे करता है

मॉनीटर एक output device है, यह इनपुट किये गये जानकारी को सॉफ्ट कापी के रूप मे स्क्रीन पर दिखाता है। इसे VGA या दूसरे केबल के माध्यम से CPU(Central Processing Unit) से जोड़ते है। मॉनीटर के नीचे दाहिने तरफ power, back, outo का बटन दिये रहते है जिनका अलग- अलग काम रहता है।


Monitor पर बहोत छोटे-छोटे चमकदार डॉट या बिंदु बने होते है जिन्हें pixels कहते है। यह pixel जितने पास होंगे इसपर जानकारी उतनी ही स्पष्ट दिखाई देती हैं। इसको DPI(Dots per inch) से मापा जाता है यह एक लाइन में pixel की संख्या को बताता है। यह matter करता है कि वह मॉनीटर कौनसा है।


मॉनीटर कितने प्रकार के होते हैं

Monitor technology के आधार पर निम्नलिखित प्रकार के होते है


CRT(Cathode Ray Tube)

यह monitor पूरा TV की तरह दिखता है, इसमे एक ट्यूब लगा होता है। जिसके एक तरफ इलेक्ट्रान गन तथा दूसरी तरफ स्क्रीन पर फासफोरस का परत चढ़ाया जाता हैं।


जब सिग्नल को CRT सर्किट से गुजारा जाता है तो इलेक्ट्रान गन से तीन तरह का सिग्नल भेजता है। इसमे RGB(Red, green, blue) तीन कलर होता है। इसमे हीटर और कैथोड भी लगे होते है।


जब इलेक्ट्रान किरण को electron gun से गुजारा जाता हैं। इसमें मैग्नेटिक deflecting coils उस beam को उर्धवाधर रूप मे मोड़ देता है। तब यह beam उस phosphorus coated स्क्रीन पर टकराती है जिससे हमें चित्र दिखाई देता है।


LCD(Liquid Crystal Display)

LCD भी एक प्रकार का monitor है, इसमे ठोस और द्रव्य पदार्थ मिले होते है इसमें एक backlight रहता है जहाँ से प्रकाश आता है। यहां पर vertical polarizing filter केवल उर्धवाधर प्रकाश को जाने देता है जो आगे लिक्विड क्रिस्टल से टकराता है।


यहाँ से लाइट क्षैतिज polarizing filter से पास होकर कलर फिल्टर पर गिरती है। इस प्रकाश को RGB में बदल दिया जाता है। यह प्रक्रिया pixel चालू होने पर होता है,


इसके बाद जब पिक्सल बंद होते है तो प्रकाश पास नहीं हो पाता है। pixel का चालू बंद होने के कारण स्क्रीन पर image दिखाई देता है। यह दो प्रकार का होता हैं।


LED(Light Emitting diodes)
LED monitor में लाइट के लिये छोटे बल्ब उपयोग किये जाते है। इसके आगे डिफ्युजर तथा प्रिज्म सीट जो लाइट को एकत्रित करके आगे पोलाराईजिगं फिल्टर से गुजारता है। तब ऑप्टिकल शीट क्षैतिज प्रकाश में बदल देता हैं जो कलर शीट पर टकराने के बाद स्क्रीन पर उच्च चित्र बनता हैं।


इसमे एक बिन्दु को भी दिखाने के लिये सभी लाइट चालू रहता हैं। यह पर्यावरण फ्रेंडली, हल्के तथा ज्यादा चलता हैं।


TFT (Thin Film Transistor)
TFT मॉनीटर लिक्विड क्रिस्टल डिस्प्ले(LCD) का नया वर्जन है। इसके प्रत्येक पिक्सल में ट्रांजिस्टर लगा होता है जो हर एक pixel को कंट्रोल करता हैं। इसमें एक TFT मैट्रिक्स लगा होता है जिससे एक अच्छा छवि बनता है। इसको ऐक्टिव मैट्रिक्स एलसीडी के रूप मे जानते है यह काफी महंगा भी होता है।

कलर के आधार पर मॉनीटर के प्रकार

कलर के हिसाब से monitor तीन प्रकार के होते है।


Monochrome monitor- मोनोक्रोम मॉनीटर
इस प्रकार के मॉनीटर में केवल एक कलर ही डिस्प्ले होता है जो CRT monitor होते है। इसमे सफेद और काला रंग दिखाई देता है जिसको 1978 में बनाया गया था।


Greyscale monitor- ग्रे-स्केल मॉनीटर
यह भी mono-chrome मॉनीटर की तरह होता हैं कई रंग को मिलाकर शेड बनाया जाता हैं। ऐसे मॉनीटर जिसमे सफेद और काला कलर का काँम्बिनेसन रहता है जो ग्रे रंग में प्रतीत होता है।


Colour monitor- कलर मॉनीटर
कलर मॉनीटर विभिन्न प्रकार के रंगों का उपयोग करता है जिसमें 16 से 1 million कलर होते है। यह RGB(लाल,हरा,नीला) कलर का सम्मिलित करता है जिससे इसको RGB monitor कहते हैं।


मॉनीटर की विशेषताएं – Moniter ki visheshtaye


Response Time
मॉनीटर के प्रत्येक पिक्सल द्वारा एक कलर को दूसरे कलर में बदलने में लगा समय response time कहते हैं। इसे मिली सेकण्ड (ms) में मापते है जिसका जितना कम समय रहेगा वह मॉनीटर उतना अच्छा हैं।


Refresh Rate
Refresh rate, मॉनीटर एक सेकंड में स्क्रीन पर दिख रहे जानकारी को कितनी बार रिफ्रेश करता है उस समय को रिफ्रेश रेट कहते है। इसे हर्टज (HZ) में मापते है।


Resolution-रिजोल्यूशन
मॉनीटर में उर्धवाधर तथा क्षितिज लाइन में लगे पिक्सल की कुल संख्या को Resolution कहते है। रिजोल्यूशन जितना ज्यादा रहेगा जूम करने पर भी चित्र अच्छा दिखाई देता है। 1024×768 pixel का SVGA(super video graphic adopter) monitor सबसे अच्छा माना जा सकता है।


Pixel-पिक्सल
मॉनिटर स्क्रिन मे पिक्सल जितने पास-पास होते है उनकी क्वॉलिटी उतनी ही बेहतर होती है । यह छोटे-छोटे dots के रूप में होते है। एक पिक्सल में 3 से 4 रंगो के छोटे LED light emitting diode लगे होते है । यह अपने पिक्सल के लाइट को कम तेज करके कलर दिखाते है। इसे PPI pixel per inch or DPI Dots per inch भी कहते हैं


Conclusion
मैं आशा करता हू कि आप लोगों को इस पोस्ट में “Monitor kya hai” से कुछ नया सीखने को मिला होगा। प्रत्येक पोस्ट में पूरी जानकारी देने का प्रयास करता हू। जिससे उस टॉपिक से जुड़ी जानकारी पूरी हो सके। अगर आपको लगता है कुछ छुट रहा है तो निःसंदेह कॉमेंट कर सकते है।

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