Printer kya hota hai (What is printer in Hindi)

हमारे स्कूल, कॉलेज या दूसरे सरकारी कामो मे कोई Project या हमें किसी document के hard copy का जरूरत होता है। Printer kya hota hai इस लेख हम जानने वाले हैं। यह आसानी से और कम समय मे पेपर पर छाप सकता है प्रिंटर आज दुनिया भर मे बड़े पैमाने पर छोटे-बड़े कामो के लिये उपयोग किया जाता है।


Computer Printer का उपयोग की-बोर्ड, माउस के बाद बहोत अधिक उपयोग होता है जो एक output device का काम करता है, यह computer से USB तार से जुड़ा रहता है, लेकिन technology बढ़ने के साथ-साथ इसमें बड़े बदलाव देखने को मिले है, अब इसे bluetooth,wi-fi तथा google cloude से भी जोड़ सकते है।


मुख्य रूप से इसका उपयोग text, image, और दोनों को एक साथ रिपोर्ट भी बनाया जाता है, Computer को आदेश देने पर उसमे save इलेक्ट्रिक डाटा तथा जानकारी को hard copy के रूप मे print हो जाता है। यह जानकारी आपके जीवन को और आसान बनाने वाला हैं तो विस्तार से जानने के लिये इस लेख मे बने रहिए। तो बिना देरी किये हुए शुरू करते हैं।


प्रिंटर काम कैसे करता हैHow Printer is work

यह एक computer का output device है, जो text, character और image को hard copy पर छापने का काम करता है, इसमें बहोत से moving parts होते है, Eg. Ribbon, head, hammer, pin matrix etc. जो छापने मे सहायता और इनका अलग-अलग काम रहता है, कुछ printer बहोत आवाज तथा दूसरे कम आवाज करते है, ink को ribbon मे लगाकर paper पर data को छापा जाता हैं।

Printer kya hai – प्रिंटर की परिभाषा

Printer kya hota hai यह एक output device है, जो computer मे save data तथा information (text, character, image) को paper पर print करता है।

What is history of printer (प्रिंटर का इतिहास क्या हैं)

Printer का इतिहास बहोत ज्यादा पुराना तो नही कह सकते लेकिन इसका इतिहास बहोत रोचक है, सर्वप्रथम Printer का design Charles babbage ने मैकेनिकल प्रिंटर को सन 19वी शताब्दी मे diffrence engine के लिये किया था। माना जाता है कि चार्ल्स बैबेज ने 20वी शताब्दी मे भी computer printer को बना नही पाये थे। कंप्युटर प्रिंटर का अविष्कार (patent) 1938 मे चेस्टर फ्लोइड कार्लसन ने किया था, जो एक अमेरिकी नागरिक थे।


सबसे पहला तेज गति का प्रिंटर 1953 मे रेमिंगटन-रोड ने प्रथम इलेक्ट्रॉनिक कंप्युटर के लिए बनाया था। इसके बाद जापान की कंपनी इप्सन ने 1968 मे पहला इलेक्ट्रॉनिक प्रिंटर को बनाया। धीरे-धीरे टेक्नोलॉजी बढ़ने के साथ-साथ printing को और आसान बनाने के लिए सन 1984 मे हेवेल्ट पैकर्ड ने सबसे पहला Ladger printer को दुनिया के सामने पेश किया। जिसने printing को और आसान बना दिया


Printer ke kitne prakar hai ( प्रिंटर के कितने प्रकार है )
दुनिया भर मे कंप्युटर प्रिंटर की अलग-अलग क्वालिटी, विशेषता तथा जटिल कार्य करने की क्षमता को देखा जाता है। जैसा की Printer kya hota hai लाइन प्रिंटर, DMP प्रिंटर, इंकजेट प्रिंटर और लेजर प्रिंटर का पहचान उनके कार्यो से किया जाता है । क्वालिटी को मापने के लिये DPI ( डॉट पर इंच) पैमाने का उपयोग किया जाता है। छापने की स्पीड पता लगाने के लिये Line per minute, Pages per minute, character per second का समय छापने मे लगता है, प्रिंटर मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं।
  1. इम्पैक्ट प्रिंटर
  2. नान-इम्पैक्ट प्रिंटर

Impact printer kya hai ( इम्पैक्ट प्रिंटर क्या है)

इम्पैक्ट प्रिंटर एक output device मे आता है, यह पेपर पर प्रिंटिंग करते समय Paper और printing head के बीच मे physical और machanical aliment का उपयोग करता है। प्रिंटिंग हेड को Ribbon भरी स्याही के एक तरफ तथा दूसरी ओर Paper को रखकर hammer उस पर प्रहार कराया जाता है, जिससे अक्षर पेपर पर छप जाते है।


इम्पैक्ट प्रिंटर के लिखने की गति बहोत धीमी तथा आवाज भी बहोत ज्यादा करते है, Printer kya hota hai यह टाइप राइटर की तरह कार्य करता है, तथा बिजली का खपत बहोत ज्यादा तथा सस्ते दामों मे मिलते है यह इमेज और ग्राफिक्स छाप नही सकता है इसका ज़्यादातर उपयोग बल्क मे छिपाई करने मे किया जाता हैं, इम्पैक्ट प्रिंटर भी दो प्रकार का होता हैं।
I. Character printer
II. Line printer

Character printer ( कैरेक्टर प्रिंटर )

यह प्रिंटर मुख्यतः इम्पैक्ट प्रिंटर को दर्शाता है, इसमे एक समय मे केवल एक ही Character छापता है, क्योकि इसमे एक समय मे print head का single stock लगता है, एक मिनट मे 50-600 कैरेक्टर print करता है, इसका गति बहोत slow है।

जिससे आज के समय मे बहोत कम उपयोग होता है इसके मापने की इकाई Character पर minute (CMP) होता है। यह भी दो प्रकार का होता है, तो इसको भी देख लेते है।
i. Dot matrix printer
ii. Daisy wheel printer

Dot matrix printer (डॉट मैट्रिक्स प्रिंटर)

इस प्रिंटर को pin printer भी कहते है, यह इम्पैक्ट प्रिंटर बहोत प्रचलित है, इसका उपयोग सरकारी कामो, बैंकों तथा अन्य जगहों पर उपयोग होता है, इसमे pin का जाल लगा रहता है, और बहोत से moving part, लगे होते है, ribbon cartage मे ink जुड़ा रहता है, pins, ink भरी ribbon पर प्रहार करके पेपर पर print करता है, यह character के साथ-साथ ग्राफिक्स को भी छापता है।


यह printer बहोत आवाज करता है और आज के समय मे काफी कम उपयोग होता है, तथा काफी सस्ते भी होते है, जो 100-600 character per second print करता है।


Daisy wheel printer ( डिजि व्हील प्रिंटर)
यह printer एक gulbahar फूल की तरह दिखता है, जो एक इम्पैक्ट प्रिंटर ही है, इसके पास एक डिस्क होता है जो घूमता रहता है, और इसके डिस्क पर अक्षर छपे रहते है, जब कोई operator इसमे पेपर डालता है तो ink भरी ribbon पर इसका हेड उस विशेष अक्षर के आने पर वार करता है, जिससे वह अक्षर छप जाता है।


इसके डिस्क मे लगभग 64 characters होते है, लेकिन इसकी print करने की गति 25-50 character per second (होती है, जो दूसरे प्रिंटर से बहोत कम तथा यह images और graphics भी नही छाप पाता है, ये printer आवाज बहोत ज्यादा करता है, जिसके वजह से इसका उपयोग बहोत ही कम होता है।

Line printer ( लाइन प्रिंटर)
यह प्रिंटर भी बाकी printer की तरह आवाज करता है, इसको बार प्रिंटर के नाम से भी जाना जाता है, यह एक समय मे एक पूरी लाइन को प्रिंट करता है, इसकी छापने की गति बाकी इम्पैक्ट प्रिंटर से बहोत तेज होता है, जो पर मिनट मे 6000 लाइन से भी अधिक छापता है।


इस प्रिंटर में एक समय मे एक से अधिक printing head काम करते है, इसमे एक चैन होता है, जो तेजी से घूमता रहता है, जिसके प्रत्येक लिंक पर अक्षर print रहता है, इसके साथ हर एक अक्षर पर प्रिंटिंग हेड लगा रहाता है, इसके भी तीन प्रकार होते है।
i. Drum printer
ii. Chain printer
iii. Band printer

Drum printer ( ड्रम प्रिंटर )
इस प्रिंटर मे सिलेंडर के आकार का एक ड्रम रहता है, यह लगातार घूमता रहाता है, जिसमे character छपे रहते है, जिसका सतह एक traks मे बटा रहता है, जब पेपर को ink भरी ribbon, drum पर रखने के बाद एक विशेष अक्षर पर जब प्रिंटिंग हेड strike करता है तो सतह पर बने tracks print करने मे मदत करते है।


Drum printer मे लाइन छापने के बाद पेपर को दूसरे लाइन के लिए ऊपर कर देता है, यह printer photo and graphics को नही छापता है, इसका छापने की गति लगभग 300-2000 character per minute ( CPM) है।


Chain printer (चैन प्रिंटर)
इस प्रिंटर मे एक चैन होता है, जिसपर 64 से 96 character लगे होते है, जो gayers का उपयोग करके श्रैतिज रुप से घूमता है, इसमे print होने वाले character के हिसाब से hammer लगे रहते है,
जब desire character ink भरी रिबन के तथा hammer के बीच आने पर hammer strike करता तब पेपर पर अक्षर छप जाते है, यह image और graphics print नही करता है और एक मिनट मे 300-500 character print करता है, जिसे LPM मे मापते है।


Band printer ( बैंड प्रिंटर)
यह प्रिंटर भी चैन प्रिंटर की तरह होते है, जिसे बेल्ट प्रिंटर के नाम से जाना जाता है, इसमे ink ribbon बहोत पतले होते है और print head श्रैतिज रुप से ड्रम प्रिंटर की तरह रखा जाता है तथा इसके hammer मे magnet लगा होने के कारण असानी से अक्षर print कर पाता है, यह अक्षर के आकार और रुप को भी बदल सकता है।

Non-Impact printer ( नान-इम्पैक्ट प्रिंटर )
यह प्रिंटर Impact प्रिंटर से बिल्कुल अलग होता है, इसे page printer के नाम से भी जाना जाता हैं, जिसमे ink ribbon नही होता है और hammer भी नही होता है, जिसके वजह से इसमे आवाज नही होता है, इस प्रिंटर की टेक्स्ट, फोटो और ग्राफिक्स का क्वालिटी बहोत साफ सुथरा तथा तेजी से छापता है, इसमे ink Ribbon के जगह पर कार्बन कलर तथा सूखा कलर होता है,


जो print करने के लिए अलग-अलग technology का उपयोग करता है, Eg. Laser, chemical, inkjet and thermal etc. इस प्रिंटर की मापने की इकाई page per minute (ppm) or page per unit (PPU) होता है, यह मुख्य रुप से तीन प्रकार होते है।

  1. Laser printer
  2. Ink jet printer
  3. Thermal printer

Ink jet printer ( इंकजेट प्रिंटर )

यह प्रिंटर घरो और छोटे बिजनेसो मे बहोत ज्यादा उपयोग होता है, इसमे ink का छिड़काव बूँदों के रूप मे एक nozel or jet की सहायता से होता है, नोजेल मे बहोत छोटा छेद और मैग्नेट लगा रहाता है इसके अलावा ink मे iron maiterials मिले होने के कारण ink के बूँदों जरूरत के हिसाब से पेपर पर गिरते है,जो छापने मे मदत करता है।


दूसरे तरीके से nozel मे Piezo electric का उपयोग होता है, यहां ink पर electric charged हो जाते है, जिससे ing की बूँदों nozel से गिरते समय control करके पेपर पर सही जगह गिरता है, जिससे यह प्रिंटर text और graphics को बहोत अच्छा छापता है, इसमे ink एक cartridge मे स्टोर रहता है,
इस प्रिंटर मे मुख्यतः चार कलर उपयोग होता है, magenta, yellow, black and cyan जो mix करके दूसरे कलर भी बनता है, इस प्रिंटर मे printing की दो विधियां उपयोग होता है।

  • Thermal bubble

इसमे ink heat होने के बाद पेपर पर गिरता है, जिसका उपयोग HP and Canon companies बहोत ज्यादा उपयोग करता है।

  • Piezo electric

यहां ink पर electric charge होने के कारण ink बूँदों के रूप मे पेपर पर गिरता है, जिसको Japanese company Epson बहोत ज्यादा उपयोग करता है।


Laser printer ( लेजर प्रिंटर)

इस प्रिंटर मे लेजर किरणों के माध्यम से प्रिंट किया जाता है, इसमे खुद का मेमरी लगी होती है तथा computer से डाटा provide किया जाता है, जब Laser beam एक miror पर पडने के बाद photo receptor drum पर पडता है, जिसके ऊपर एक रोड लगा होता है, जो नेगेटिव चार्ज उत्पादन करता है, तथा ड्रम के नीचे दूसरे ड्रम मे high पॉजिटिव चार्ज रहता है।


ड्रम के आगे toner (कलर का पाउडर ) जो drum से सटा रहता है, टोनर के पहले एक डॉक्टर ब्लेड लगा होता है जो टोनर पर 15-micron कलर का layer चढ़ाने मे मदत करता है जब किसी पेपर को print के लिए अन्दर डालते है तो photo receptor drum पर text, photo and graphics पेपर पर पॉजिटिव चार्ज के कारण टोनर की सहायता से data को छाप देता है।इसके बाद पेपर को fusion roller से गुजारा जाता है जो 260 °C गरम रहता है,


जब पेपर पर heat and pressure लगता है तो डाटा स्थायी रूप से पेपर पर छाप देता है। यह 300-1200 DPI (Dots per inch) की सबसे हाई क्वालिटी का print छापता है।


Thermal printer

यह device मॉल छोटे बड़े दुकानों मे बहोत ज्यादा उपयोग किया जाता है, इसमे एक heat sensitive paper उपयोग किया जाता है, जो रोल के रूप मे रहता है, जो डॉट मैट्रिक्स यंत्र की तरह pins से पेपर पर strike करता है लेकिन इसमे काफी ज्यादा गरम रहता है, पेपर पर पडते ही वह पूरा जगह कला हो जाता है, जिससे text को print करता है जो temporary होता है। इसे electro thermal printer के नाम से भी जाना जाता है।


आपने आज क्या सीखा

दोस्तो मेरे द्वारा बताये गये इस लेख मे printer kya hota hai मैं आशा करता हू की आप लोगो को समझ मे आया होगा, अगर कुछ छुट गया हो तो जरूर comment करिये इसी तरह जानकारी लेने के लिए इस ब्लॉग को follow तथा share करिये ताकी दूसरे लोग भी इसके बारे मे जान सके।

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